बुधवार, 24 दिसंबर 2008

युद्ध का नाटक क्यों ?

मुम्बई आतंकी हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में जो खटास आई है॥ उसका असर आजकल साफतौर पर देखा जा सकता है॥ निरंतर दोनो तरफ से बयानबाजी जारी है॥ और युद्ध का नाटक खेला जा रहा है या फिर ये कह सकते हैं कि वार लाइक सिचुएशन बनाई जा रही है॥ दोनों देश जानते हैं कि वो किसी हाल में युद्ध लड़ने कि स्थिति में नहीं हैं फिर भी न जाने क्यों हमारे नुमाइंदों को ये बात समझ नहीं आ रही है वैसे ही आर्थिक मंदी का राक्षस मुंह बाये खड़ा है॥ ऐसे में युद्ध सोचना भी बेवकूफी॥ शायद भारत पाक पर प्रेशर डालकर आतंकियों पर कार्रवाई चाहता तो वहीं पाकिस्तान उल्टा चोर कोतवाल की तर्ज पर आंखे दिखा रहा है॥ पाक की भी अपनी मजबूरी आतंकियों पर कार्रवाई करता है तो फंसता है और युद्ध लड़ता है तब तो तबाह ही हो जायेगा...भारत की भी लगभग ऐसी ही स्थिति है॥ उसको सबसे बड़ा ख़तरा एट़ॉमिक हमले का है... ऐसे अगर सारी समस्या का हल कुछ नजर आता है तो सिर्फ और सिर्फ एक ही है॥ और वो है कि हम आंतरिक सुरक्षा और इंटेलिजेंस को मजबूत करें...बीमारी में आपरेशन करवायें ना कि अंग ही कटवा लें॥उधर पाकिसतान के लिए भी दो रास्ते बचते हैं कि वो धीरे धीरे आतंकियो पर कार्रवाई करे और आर्थिक रुप से खुद को मजबूत करे...नहीं तो पाकिस्तान का भस्मासुर एक ना एक दिन उसे तबाह कर देगा॥ हां सारा पाकिस्तान तबाह कर उसे कश्मीर चाहिए तो हम तैयार॥क्योंकि महाभारत में कृष्ण ने भी कहा है... किसी भी समस्या आखिरी हल युद्द ही है... हां लेकिन उसकी सिर्फ और सिर्फ बर्बादी है दोनो के लिए

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