शुक्रवार, 16 जनवरी 2009

मैं इच्छा...

इच्छा...शायद मेरा नाम ही काफी है ये बताने को कि मैं कौन हूं...मैं हर उस आम व्यक्ति के अंदर रहती हूं जिसे जाने अनजाने, चाहकर या बिना चाहे मुझे पूरा करने के लिए जद्दोजहद करनी ही पड़ती है...शायद इसलिए मुझे खुद भी अपनी ज़िंदगी में जद्दोजहद करनी पड़ रही है....लेकिन ऐसा नहीं है कि इच्छा सिर्फ उन्ही के पास है जो उसे पूरा करने की कोशिश में लगे है....इच्छा हर व्यक्ति के पास उसके मन में इस तरह रहती है जैसे उसका अधिकार हो....मैं इच्छा हर किसी के साथ हूं....चाहे वो कोई पैसेवाला हो या ग़रीब...मेरा साथ सब के लिए बराबर है....मैं आपकी इच्छा....

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